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दीप और धुन · संपूर्ण पाठ

श्री हनुमान जी की आरती

प्रेम से गाएँ, श्रद्धा से पढ़ें और मन में सेवा, साहस तथा सकारात्मकता का दीप जलाएँ।

श्री राम भक्त हनुमान को नमनसम्पूर्ण आरती

01आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

02जाके बल से गिरिवर काँपे। रोग दोष जाके निकट न झाँके॥

03अंजनि पुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सहाई॥

04दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥

05लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥

06लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सँवारे॥

07लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि संजीवन प्राण उबारे॥

08पैठि पाताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥

09बाएँ भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे॥

10सुर नर मुनि आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥

11कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई॥

12जो हनुमान जी की आरती गावे। बसि बैकुंठ परम पद पावे॥

13लंका विध्वंस किए रघुराई। तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई॥

14आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

15जय बजरंगबली। जय हनुमान। जय श्री राम।

दीपश्री हनुमान जी की आरती सम्पूर्णजय श्री राम · जय बजरंगबली
भावार्थ

भक्ति और सेवा का प्रकाश

आरती हनुमान जी के पराक्रम, करुणा और श्री राम के कार्य में उनके निष्काम समर्पण का स्मरण कराती है।

दीपक का प्रकाश मन के अंधकार को दूर करने और सही मार्ग पर चलने का प्रतीक है। श्रद्धा के साथ आरती पढ़ते हुए अपने भीतर साहस, विनम्रता और सेवा का भाव जगाएँ।

जय हनुमान

श्रद्धा से पढ़ें, शांत मन से आगे बढ़ें।

भक्तिमय संगीत
भोर की स्तुतिभजन सुनें
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