लोकप्रिय भक्ति-कथा
हनुमान जी और सिंदूर से जुड़ी यह कथा रामभक्ति की लोकपरंपराओं में लोकप्रिय है। एक दिन हनुमान जी ने माता सीता को माँग में सिंदूर लगाते देखा और विनम्रता से उसका कारण पूछा। माता सीता ने बताया कि यह श्री राम की मंगलकामना और दीर्घ जीवन के लिए लगाया जाता है।
हनुमान जी ने सोचा कि यदि थोड़ा-सा सिंदूर श्री राम के लिए इतना मंगलकारी है, तो वे अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगाकर प्रभु के लिए और भी बड़ा मंगल अर्पित करेंगे। यह प्रसंग उनके बालसुलभ प्रेम और पूर्ण समर्पण को दर्शाता है।
अर्पण का भाव
जब श्री राम ने हनुमान जी को सिंदूर से रँगा देखा, तो वे उनके प्रेम से प्रसन्न हुए। भक्त इस कथा को इस भाव से याद करते हैं कि भगवान को बाहरी वस्तु से अधिक अर्पण के पीछे छिपा प्रेम प्रिय होता है।
सिंदूर चढ़ाने की परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों और मंदिरों में अलग रूपों में दिखाई देती है। इसे लोकविश्वास और भक्ति-परंपरा के रूप में सम्मानपूर्वक समझना चाहिए।
भक्ति की सीख
यह कथा हमें दिखाती है कि सच्चा समर्पण गणना नहीं करता। प्रेम जब सरल और निष्काम होता है, तब छोटा-सा अर्पण भी हृदय की बड़ी प्रार्थना बन जाता है।
“भक्ति का मूल्य अर्पण की मात्रा में नहीं, उसके प्रेम और समर्पण में होता है।”